फ्लोर टेस्ट ना कराए जाने को लेकर मध्य प्रदेश बीजेपी पहुंची सुप्रीम कोर्ट

मध्यप्रदेश में जारी सियासी संग्राम देखते हुए 16 मार्च को होने वाले फ्लोर टेस्ट को निरस्त कर बजट सत्र की कार्यवाही तो 26 मार्च के बाद शुरू करने की बात कही गई है। वहीं इस फैसले का मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी इसका कड़ा विरोध कर रही है और इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार को सुनवाई की जाएगी। बता दें कि बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने 106 विधायकों को राज्यपाल के सामने परेड कराई। इसके बाद राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा है कि जो भी कार्यवाही होगी वह संविधान के नियमों के अनुसार होगी और किसी भी विधायक के अधिकार का हनन नहीं किया जाएगा।

वही कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकती है 16 विधायकों के गायब होने को लेकर ।

नाइट क्लब, जिम को बंद करने के साथ ही दिल्ली में 50 लोगों ले एक साथ इकठ्ठा होने पर लगी रोक

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के सभी स्पा, नाइट क्लब, स्विमिंग पूल और जिम को 31 मार्च के लिए बंद करने के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से अपील की है कि वह दिल्ली में कहीं भी 50 से ज्यादा लोग एक साथ एकत्रित ना हो।

हालाँकि शादी -व्याह को इस नियम से अलग रखा गया है। सीएम केजरीवाल ने अपील की है कि बहुत जरूरी ना हो तो शादी के कार्यक्रम को 31 मार्च के बाद संपन्न किए जाएं। हालांकि दिल्ली में अभी मार्केट और मॉल्स को बंद नहीं किए गए हैं क्योंकि जरुरी चीजों के लिए इनका बंद करना उचित नहीं है।

26 मार्च तक के लिए कमलनाथ की कुर्सी बची, मध्य प्रदेश विधानसभा बजट सत्र हुआ स्थगित

मध्य प्रदेश की राजनीति में चल रही गहमागहमी के बीच नया मोड़ आ गया है जिसकी उम्मीद पहले से जताई जा रही थी। जी हां मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने बजट सत्र के पहले दिन अपना अभिभाषण 1 मिनट में खत्म करते हुए मध्यप्रदेश बजट सत्र की कार्यवाही को 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया है।

वहीं अपने अभिभाषण के दौरान महामहिम ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश के जो भी सांसद और विधायक हैं वह अपने कर्तव्य और संविधान की रक्षा करें। बता दें कि आज शक्ति परीक्षण और फ्लोर टेस्ट के लिए बीजेपी और कांग्रेस के तरफ से सभी विधायकों को सदन में उपस्थित रहने की का आदेश जारी किया गया था।

वहीं सिंधिया खेमे के विधायकों को कहाँ रखा गया किसी को नहीं पता। कुल मिलाकर 26 मार्च तक के लिए मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार सुरक्षित है।

कांग्रेस के 74 विधायक लौटे भोपाल

मध्यप्रदेश में होने वाले फ्लोर टेस्ट के लिए कांग्रेस ने अपने 74 विधायकों को वापस भोपाल बुला लिया है। बता दें कि इन विधायकों को जयपुर के एक होटल में ठहराया गया था।

फ्लोर टेस्ट को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने भी नोटिस जारी करते हुए कहा है कि सभी विधायक कल फ्लोर टेस्ट के दौरान मौजूद रहे और अनिवार्य रूप से बीजेपी के पक्ष में मतदान करें। बुधवार को ही कांग्रेस के 90 विधायक भोपाल से जयपुर पहुंच गए थे और इन्हे जयपुर में लग्जरी होटल में ठहराया गया था। इन विधायकों के आगमन को ध्यान में रखते हुए भोपाल एयरपोर्ट पर बेहद कड़े सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।

हवाई अड्डे के आसपास धारा 144 लगाकर भीड़ इकट्ठा ना होने के आदेश जारी कर दी गई है।

बर्ड फ्लू की आशंका के चलते केरल में मुर्गा -मुर्गियों को मारने के आदेश

एक तरफ जहां देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है, वहीं केरल राज्य में बर्ड फ्लू की आशंका जताई जा रही है। इस सूचना के बाद केरल सरकार ने सभी पोल्ट्री फॉर्म में पल रहे मुर्गे और मुर्गियों को मारने के आदेश दे दिए हैं।

बता दें कि केरल के मलप्पुरम जिले में पलथींगल में बर्ड फ्लू के मामले सामने आए हैं। वहीं इस एरिया के 1 किलोमीटर की रेंज में मुर्गियों को मारने के आदेश जारी किए गए हैं।

इतना ही नहीं इस एरिया के 10 किलोमीटर के क्षेत्र में चिकन पालतू जानवर और अंडे तक बेचने पर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। बता दें कि केरल में अब तक 19 कोरोना वायरस के मरीज पाए गए हैं।

दिल्ली विधानसभा में पास हुआ एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव

गुरुवार को राज्यसभा में अमित शाह द्वारा एनपीआर के सन्दर्भ में बयान देने के बाद आज दिल्ली विधानसभा में एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पास किया गया है। इस बारे में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि जैसा कि गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि एनपीआर के लिए कोई डॉक्युमेंट्स नहीं मांगा जाएगा लेकिन उन्होंने एनआरसी के बारे में कोई बात नहीं कही है।

वहीं एनपीआर आएगा तो उसके पीछे एनआरसी भी आएगी ऐसे में एनपीआर नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अमित शाह के क्रोनोलॉजी वाले बयान को ट्वीट करते हुए कहा कि सीएए आएगा उसके बाद एनपीआर आएगा फिर एनआरसी आएगी, यह तीनों नियम एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

ऐसे में अगर एनपीआर लागू कर दिया गया तो बाद में पछताने के आलावा कुछ भी हाथ नहीं लगेगा।

कोरोना वायरस के चलते उत्तर प्रदेश में 22 मार्च तक बंद रहेंगे सभी स्कूल और कॉलेज

उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के 12 मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह फैसला लिया है कि प्रदेश के सभी स्कूल व कालेज 22 मार्च तक के लिए बंद कर दिए जाएंगे। हालांकि सरकार ने कहा है कि जिन विद्यालय में परीक्षाएं चल रही हैं वह स्थगित नहीं होंगी और परीक्षा वाले दिन परीक्षा दी जा सकती है।

इतना ही नहीं है उत्तर प्रदेश में कॉलेज मेडिकल कॉलेज को भी 22 मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है। वहीं अगर किसी स्कूल में परीक्षा अगर शुरू नहीं हुई है तो इसे 22 मार्च के बाद कराए जाने की बात कही गई है। हालांकि उत्तर प्रदेश में कोरोना को अभी महामारी घोषित नहीं किया गया है लेकिन कुछ ऐसे नियम हैं जिन्हें लागू किया जाएगा।

7 महीने बाद नजरबंदी से रिहा हुए फारुख अब्दुल्ला

जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 के हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर के सभी बड़े नेताओं को उनके आवास में नजरबंद कर दिया गया था।

वहीं जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को उनके श्रीनगर के गुपकार रोड स्थित उनके आवास से आज 7 महीने की नजरबंदी के बाद रिहा कर दिया गया है। रिहाई के बाद फारुख अब्दुल्ला अपने परिवार के साथ खड़े नजर आए।

वहीं जब पत्रकारों ने उनसे कुछ बोलने को कहा तो उन्होंने कहा कि मेरे पास शब्द नहीं है अपनी खुशी बयान करने के लिए। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही वह दिल्ली में मौजूद होंगे संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए।

कमलनाथ की सिफारिश पर राज्यपाल ने हटाए सिंधिया समर्थक 6 मंत्री

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की सिफारिश पर फ्लोरटेस्ट से पहले 19 बागी विधायकों को बुलाने के आदेश पर सभी 19 विधायक आज भोपाल वापस आ रहे हैं। वहीं इनकी वापसी से पहले ही कमलनाथ ने राज्यपाल से मिलकर सिंधिया समर्थक 6 मंत्रियों को उनके पद से हटाने की सिफारिश की जिसके बाद राज्यपाल लालजी टंडन ने इन्हे इनके पद से बर्खास्त कर दिया है।

वहीं 19 बागी विधायकों के भोपाल आने से पहले ही कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों के समर्थक भारी संख्या में भोपाल एयरपोर्ट पर मौजूद हैं। वहीं प्रशासन ने इनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट के आसपास धारा 144 लगा दिया है।

कहा जा रहा है कि सिंधिया समर्थक सभी विधायक उनके राज्य सभा नॉमिनेशन में भी उपस्थित रहेंगे। जिन मंत्रियों को उनके पद से हटाया गया है उनमें इमरती देवी, तुलसी सिलावट, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युम्न सिंह सिसोदिया और प्रभु राम चौधरी के नाम शामिल हैं।

मध्य प्रदेश की हलचल बहुत कुछ कहती है!

पिछले दिनों मध्यप्रदेश में जो राजनीतिक उठापटक हुई उसने भारतीय जनता पार्टी की बांछें खिला दी है। प्रदेश नेतृत्व से लेकर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व तक इस खुशी में झूम रहा है। इस ख़ुशी को लेकर वाजिब कारण है क्योंकि तमाम प्रदेशों में यह एक के बाद एक हार से केंद्र को लेकर भी भाजपा नेतृत्व सशंकित नजर आ रहा है। वहीं मध्य प्रदेश जैसे बड़े स्टेट में अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसा मजबूत क्षत्रप उसकी पार्टी से आ मिलता है तो यह उसके लिए बड़ी राहत की बात है। यूं तो मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान बेहद लोकप्रिय रहे हैं लेकिन इस तमाम लोकप्रियता के बावजूद 2018 विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपनी सत्ता गंवानी पड़ी थी।

बेशक यह 19 -20 के ही अंतर से था लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के क्षेत्र चंबल, ग्वालियर से लगभग सभी सीटें भाजपा के हाथ से निकल गयीं थी।

विशेषज्ञ बताते हैं कि आज के समय में भी सिंधिया परिवार का क्षेत्र में काफी दबदबा है और यह सब नजर आया जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक इशारे पर 22 से अधिक कांग्रेस विधायकों ने एक झटके में इस्तीफा दे दिया। ना केवल विधायक बल्कि प्रदेश स्तर पर और जिला स्तर पर तमाम कार्यकर्ता नेता पार्टी छोड़ते नजर आए और कांग्रेस पार्टी के दफ्तर में इस्तीफा की झड़ी लग गई।

प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान तो इतने खुश हैं कि उनको समझ ही नहीं आ रहा है क्या बोलें और क्या ना बोले? भावुक होकर उन्होंने कांग्रेसी दिग्गज कमलनाथ की लंका जलाने की बात तो कही ही लेकिन साथ ही में उन्होंने ज्योतिरादित्य को भी विभीषण बता डाला।

अब यह बात उन्होंने अनजाने में कही है या फिर जानबूझकर यह एक चर्चा का विषय हो सकता है, लेकिन हर एक ट्वीट में हर एक संदेश में वह महाराज के साथ खड़े होने का दावा कर रहे हैं ताकि किसी भी हाल में वह सीएम पद की शपथ लें और पार्टी के भीतर से उनको चुनौती ना मिल सके। वैसे भी उन्हें नरोत्तम मिश्रा और नरेंद्र तोमर के नाम से थोड़ी बहुत ही सही लेकिन सुगबुगाहट जरूर मिल रही है। हालांकि केंद्रीय नेतृत्व के खुश होने के पीछे की वजह थोड़ी लंबी है। तमाम लोग कह रहे हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को भारतीय जनता पार्टी में वह सम्मान नहीं मिलेगा जो उन्हें कांग्रेस में मिलता था।

पहले के भाजपा के संदर्भ में देखें तो यह बात एक तरफ से वाजिब लगती किंतु वर्तमान भाजपा थोड़ी अलग है विचारधारा के स्तर पर

अमित शाह ज्यादा परवाह नहीं करते हैं और हर एक उस व्यक्ति को वह पार्टी में शामिल करने की पुरजोर कोशिश करते हैं जो लोकसभा चुनाव में मददगार हो सके। रोजगार, अर्थव्यवस्था और दूसरे तमाम मोर्चों पर केंद्र से जनता की नाराजगी को भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व बखूबी भाप रहा है ऐसी स्थिति में 2024 के लिए तमाम मोहरे तैयार किए जा रहे हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया भी राज्य में भाजपा की सरकार बने इससे ज्यादा केंद्रीय नेतृत्व के लिए इस हेतु महत्वपूर्ण है कि लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश से भारी मात्रा में भाजपा को सीटें मिलने में रुकावट ना हो। भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान नेतृत्व में ज्योतिरादित्य सिंधिया का मामला हो चाहे नीतीश कुमार का उन लोगों को पर्याप्त सम्मान देना जिनके प्रभाव से लोकसभा चुनाव में उसे मदद मिल सकती है। और यही हमें मध्य प्रदेश में देखने को मिला है।

– गणेश यादव, सम्पादक
(लोकतंत्र की बुनियाद, राष्ट्रीय हिंदी पत्रिका)