जिंदा दफना दूंगा: यूपी के मंत्री ने ‘क्या’ कह दिया?

उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रघुराज सिंह ने CAA के सपोर्ट में अलीगढ़ के नुमाइश ग्राउंड में आयोजित सभा में विवादित बयान देते हुए कहा है कि “वह नरेंद्र मोदी और आदित्यनाथ योगी के खिलाफ नारे लगाने वालों को जिंदा दफना देंगे।”

गौरतलब है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में सीएए के साथ एनआरसी व एनपीआर के खिलाफ चलाए जा रहे स्टूडेंट्स मूवमेंट पर निशाना साधते हुए उन्होंने यह बात कही। इन्हीं स्टूडेंट्स मूवमेंट में पीएम मोदी और उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ के खिलाफ ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए गए थे।

ज़िंदा दफनाने के बयान के अतिरिक्त उन्होंने गांधी परिवार पर भी जमकर जुबानी हमला करते हुए कहा कि ‘नेहरू की कोई जाति है? उनका खानदान ही नहीं था।’

पढाई का माहौल ख़राब कर रही हैं वाम पार्टियां, शिक्षाविदों का पीएम को सामूहिक-पत्र

देश में 208 शिक्षाविदों ने विश्वविद्यालयों में वाम दलों द्वारा माहौल ख़राब करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। जिस प्रकार जेएनयू, जामिया तक, एएमयू और जादवपुर विश्वविद्यालय इत्यादि शिक्षण-संस्थानों के कैम्पस में हालिया घटनाएं हुई हैं, वह वामपंथी कार्यकर्ताओं के एक छोटे से समूह की शरारत प्रतीत होती है। इस बयान पर हस्ताक्षर करने वाले लोगों में हरि सिंह गौर यूनिवर्सिटी के कुलपति आरपी तिवारी, दक्षिण बिहार सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वीसी एचसीएस राठौर एवं सरदार पटेल यूनिवर्सिटी के वीसी शिरीष कुलकर्णी सहित अन्य लोग शामिल हैं।

गौरतलब है कि इसे ‘शैक्षणिक संस्थानों में वामपंथी अराजकता के खिलाफ बयान’ शीर्षक के नाम से प्रधानमंत्री को भेजा गया है। समझना आसान है कि 208 शिक्षाविदों के इस बयान को अकादमिक जगत में समर्थन जुटाने का शासन द्वारा किया गया प्रयास माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की दिल्ली रैली में भारी सुरक्षा व्यवस्था

देशभर में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के बीच प्रधानमंत्री मोदी की दिल्ली में रैली हो रही है, जहां देश भर से भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक पहुंच रहे हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा को लेकर तमाम एजेंसियां चौकस हैं और रामलीला मैदान में होने वाली इस रैली को सीसीटीवी और ड्रोन से वाच किया जा रहा है।

हालांकि सीधे तौर पर इस रैली का नागरिकता संशोधन कानून से संबंध नहीं है, बल्कि दिल्ली में 1731 अवैध कालोनियों को नियमित करने के बाद इस रैली का आयोजन दिल्ली प्रदेश द्वारा किया गया है। गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव जल्द ही आयोजित किये जाने वाले हैं। तमाम विश्लेषक इस रैली में प्रधानमंत्री के वक्तव्य पर नजर गड़ाए हुए हैं क्योंकि यहां से निकले संदेश की आहट दूर तक जाने की संभावना है।