दिल्ली में कंस्ट्रक्शन पर रोक के बाद मजदूर हो रहे हैं बदहाल, आम आदमी पार्टी ने उठाया सवाल

Sanjeev Jha, MLA, Sant Nagar Burari, Delhi

यह दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि हमारे देश की राजधानी दिल्ली विश्व के टॉप 10 प्रदूषित शहरों में शामिल है।

हर साल अक्टूबर से दिसंबर तक तो प्रदूषण का लेवल इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि इस शहर को “गैस का चेंबर” कहा जाने लगता है। यहाँ प्रदूषण के तमाम कारण गिनाए जाते हैं जिनमें पड़ोसी राज्यों द्वारा जलाए जाने वाली पराली, कचरा -कूड़ा जलाना, सड़कों पर अत्यधिक ट्रैफिक और रेजिडेंशियल एरिया में होने वाले कंस्ट्रक्शन कार्यों के नाम प्रमुखता से लिए जाते हैं।

कंस्ट्रक्शन कार्यों की अगर हम बात करें तो जब भी प्रदूषण का लेवल बढ़ता है तब दिल्ली में कंस्ट्रक्शन कार्यों को पूरी तरीके से रोक दिया जाता है। सरकार के इस आदेश के बाद हजारों की संख्या में मजदूर जो दूसरे राज्यों से आकर यहां मजदूरी करते हैं और तब उनकी दो वक्त की रोटी का इंतजाम होता है, उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

इसका मतलब यह कतई नहीं कि प्रदूषण के प्रति जागरूकता या कार्य नहीं होना चाहिए, किन्तु गरीबों को रोटी कहाँ से मिलेगी, इस बात का इंतजाम भला कौन करेगा?

अगर निर्माण कार्य पर रोक हफ्ते -दस दिन के लिए होता है तो ये मजदूर वर्ग कैसे भी उधार ले कर अपनी जीविका चला लेते हैं। लेकिन अगर यही रोक महीनों तक चले तो शहर में इन्हें कोई उधार देने वाला भी नहीं बचता है। फिर ऐसे में इन मजदूरों के सामने वापिस अपने गांव जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है।

घोर आश्चर्य का विषय यह है कि कई सालों से यह प्रक्रिया जारी है लेकिन ना ही राज्य सरकार और ना ही केंद्र सरकार का ध्यान इन गरीबों की तरफ जा रहा है। सरकारें इन हजारों गरीब मजदूरों के रोजी रोटी के संदर्भ में कभी भी गंभीरता से विचार नहीं करती, जबकि 2017 के प्रदूषण के दौरान जब एनजीटी द्वारा दिल्ली में कंस्ट्रक्शन के कार्यों पर रोक लगाया गया था तब खुद एनजीटी ने कहा था कि कंस्ट्रक्शन का कार्य बंद होता है तो बिल्डर्स इसके लिए जिम्मेदार हैं।

बिल्डर्स इसलिए जिम्मेदार हैं क्योंकि वह प्रदूषण बढ़ाते हैं, लेकिन इसकी सजा मजदूरों को नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि काम उनकी वजह से नहीं बंद हुआ है। इतना ही नहीं, NGT ने इसके बदले उन्हें मुआवजा दिलाने की बात भी कही थी। एनजीटी इस बात को समझता है कि कंस्ट्रक्शन के कार्य बंद हो जाने के बाद मजदूरों को मुआवजा मिलना चाहिए तो फिर राज्य और केंद्र सरकार इन मजदूरों के संदर्भ में आंख क्यों मुद्दे हुए हैं?

हालाँकि, दबी जुबान में इसका कारण राजनीतिक भी बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार केंद्र में शासन कर रही भाजपा सरकार यह जानती है कि दिल्ली का गरीब-मजदूर वर्ग आम आदमी पार्टी का वोटर है और भाजपा दिल्ली चुनाव के मद्देनज़र मजदूरों को दिल्ली से दूर करना चाहती है। हालाँकि, सच क्या है कोई नहीं जानता, किन्तु मजदूरों की व्यथा निश्चित रूप से सच है, इस बात में दो राय नहीं।

रिपोर्ट: गणेश यादव
(लोकतंत्र की बुनियाद)