कोरोना में महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है “पी कोन”

पब्लिक प्लेसेज पर टॉयलेट अक्सर गंदे ही रहते हैं. पुरुष तो इसका इस्तेमाल खड़े-खड़े कर लेते हैं, लेकिन मुश्किल महिलाओं को होती है. बेहद मजबूरी में उन्हें उसी गंदे टॉयलेट पर बैठना पड़ता है, क्योंकि उनके सामने कोई और विकल्प नहीं होता है.
ऐसे में ”पी कोन” नामक प्रोडक्ट महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है. इससे न केवल हाइजीन मेंटेन रह सकती है, बल्कि कोरोना जैसे संकट से भी बचा जा सकता है. यूरिनल के लिए यह आविष्कार निश्चित रूप से एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है. इसकी और जानकारी आप इसकी वेबसाइट http://www.peecone.com से प्राप्त कर सकते हैं

कोरोना वायरस से बचने के लिए खानपान में शामिल करें इन चीजों को

भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए खानपान की चीजों में परिवर्तन लाने की बात कही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि खाना बनाते समय सरसों के तेल या रिफाइंड की जगह पर आपको नारियल तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियों को अपने खाने में शामिल करना चाहिए।

इसके साथ ही वैज्ञानिकों का कहना है कि बेरीज में क्रैनबेरिज, ब्लूबेरिज, अंगूर और डार्क चॉकलेट को भी अपने खाने में जगह दे क्योंकि इससे फंगल इंफेक्शन के खतरे कम हो जाते हैं। वहीं खाने में स्टार सौंफ और अदरक को भी शामिल करने की बात कही जा रही है क्योंकि इनमें एंटीवायरल तत्व होते हैं।

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए डॉक्टर तुलसी और लहसुन को भी खाने में शामिल करने की बात कह रहे हैं। इसके साथ ही डॉक्टरों द्वारा कच्ची हरी सब्जियों, मीट मछली तथा अंडो से भी दूरी बनाने की बात कही जा रही है।

भारतीय सेना में शामिल हुए अमेरिकी रायफल ‘सिग-सौर 716’

अमेरिका के साथ भारत के 700 करोड़ डील के अंतर्गत समझौता हुआ था जिसमें अमेरिका के राइफल्स को भारतीय सेना में शामिल करने की बात हुई थी। वहीं इस डील के अनुसार सिग-सौर 716 की 10 हजार राइफल भारत में पहुंच चुकी है और सेना को सौंप दी गई हैं। बता दें कि अमेरिका के सिग-सौर कंपनी द्वारा भारत ने डायरेक्ट यह डील की थी।

वहीं इस राइफल को भारत सहित एक दर्जन से ज्यादा देश की सेना में शामिल किया गया है। वहीं भारतीय सेना की बात करें तो इसकी पहली खेप उधमपुर स्थित कमान को भेजी गई है। इस राइफल का इस्तेमाल फ्रंटलाइन सैनिक और एंटी टेरर ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जाएगा।

इस राइफल की खासियत की बात करें तो इसकी रेंज 500 मीटर की है और ‘शूट टू किल’ के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

बर्ड फ्लू की आशंका के चलते केरल में मुर्गा -मुर्गियों को मारने के आदेश

एक तरफ जहां देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है, वहीं केरल राज्य में बर्ड फ्लू की आशंका जताई जा रही है। इस सूचना के बाद केरल सरकार ने सभी पोल्ट्री फॉर्म में पल रहे मुर्गे और मुर्गियों को मारने के आदेश दे दिए हैं।

बता दें कि केरल के मलप्पुरम जिले में पलथींगल में बर्ड फ्लू के मामले सामने आए हैं। वहीं इस एरिया के 1 किलोमीटर की रेंज में मुर्गियों को मारने के आदेश जारी किए गए हैं।

इतना ही नहीं इस एरिया के 10 किलोमीटर के क्षेत्र में चिकन पालतू जानवर और अंडे तक बेचने पर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। बता दें कि केरल में अब तक 19 कोरोना वायरस के मरीज पाए गए हैं।

7 महीने बाद नजरबंदी से रिहा हुए फारुख अब्दुल्ला

जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 के हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर के सभी बड़े नेताओं को उनके आवास में नजरबंद कर दिया गया था।

वहीं जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को उनके श्रीनगर के गुपकार रोड स्थित उनके आवास से आज 7 महीने की नजरबंदी के बाद रिहा कर दिया गया है। रिहाई के बाद फारुख अब्दुल्ला अपने परिवार के साथ खड़े नजर आए।

वहीं जब पत्रकारों ने उनसे कुछ बोलने को कहा तो उन्होंने कहा कि मेरे पास शब्द नहीं है अपनी खुशी बयान करने के लिए। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही वह दिल्ली में मौजूद होंगे संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए।

कमलनाथ की सिफारिश पर राज्यपाल ने हटाए सिंधिया समर्थक 6 मंत्री

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की सिफारिश पर फ्लोरटेस्ट से पहले 19 बागी विधायकों को बुलाने के आदेश पर सभी 19 विधायक आज भोपाल वापस आ रहे हैं। वहीं इनकी वापसी से पहले ही कमलनाथ ने राज्यपाल से मिलकर सिंधिया समर्थक 6 मंत्रियों को उनके पद से हटाने की सिफारिश की जिसके बाद राज्यपाल लालजी टंडन ने इन्हे इनके पद से बर्खास्त कर दिया है।

वहीं 19 बागी विधायकों के भोपाल आने से पहले ही कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों के समर्थक भारी संख्या में भोपाल एयरपोर्ट पर मौजूद हैं। वहीं प्रशासन ने इनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट के आसपास धारा 144 लगा दिया है।

कहा जा रहा है कि सिंधिया समर्थक सभी विधायक उनके राज्य सभा नॉमिनेशन में भी उपस्थित रहेंगे। जिन मंत्रियों को उनके पद से हटाया गया है उनमें इमरती देवी, तुलसी सिलावट, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युम्न सिंह सिसोदिया और प्रभु राम चौधरी के नाम शामिल हैं।

मध्य प्रदेश की हलचल बहुत कुछ कहती है!

पिछले दिनों मध्यप्रदेश में जो राजनीतिक उठापटक हुई उसने भारतीय जनता पार्टी की बांछें खिला दी है। प्रदेश नेतृत्व से लेकर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व तक इस खुशी में झूम रहा है। इस ख़ुशी को लेकर वाजिब कारण है क्योंकि तमाम प्रदेशों में यह एक के बाद एक हार से केंद्र को लेकर भी भाजपा नेतृत्व सशंकित नजर आ रहा है। वहीं मध्य प्रदेश जैसे बड़े स्टेट में अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसा मजबूत क्षत्रप उसकी पार्टी से आ मिलता है तो यह उसके लिए बड़ी राहत की बात है। यूं तो मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान बेहद लोकप्रिय रहे हैं लेकिन इस तमाम लोकप्रियता के बावजूद 2018 विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपनी सत्ता गंवानी पड़ी थी।

बेशक यह 19 -20 के ही अंतर से था लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के क्षेत्र चंबल, ग्वालियर से लगभग सभी सीटें भाजपा के हाथ से निकल गयीं थी।

विशेषज्ञ बताते हैं कि आज के समय में भी सिंधिया परिवार का क्षेत्र में काफी दबदबा है और यह सब नजर आया जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक इशारे पर 22 से अधिक कांग्रेस विधायकों ने एक झटके में इस्तीफा दे दिया। ना केवल विधायक बल्कि प्रदेश स्तर पर और जिला स्तर पर तमाम कार्यकर्ता नेता पार्टी छोड़ते नजर आए और कांग्रेस पार्टी के दफ्तर में इस्तीफा की झड़ी लग गई।

प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान तो इतने खुश हैं कि उनको समझ ही नहीं आ रहा है क्या बोलें और क्या ना बोले? भावुक होकर उन्होंने कांग्रेसी दिग्गज कमलनाथ की लंका जलाने की बात तो कही ही लेकिन साथ ही में उन्होंने ज्योतिरादित्य को भी विभीषण बता डाला।

अब यह बात उन्होंने अनजाने में कही है या फिर जानबूझकर यह एक चर्चा का विषय हो सकता है, लेकिन हर एक ट्वीट में हर एक संदेश में वह महाराज के साथ खड़े होने का दावा कर रहे हैं ताकि किसी भी हाल में वह सीएम पद की शपथ लें और पार्टी के भीतर से उनको चुनौती ना मिल सके। वैसे भी उन्हें नरोत्तम मिश्रा और नरेंद्र तोमर के नाम से थोड़ी बहुत ही सही लेकिन सुगबुगाहट जरूर मिल रही है। हालांकि केंद्रीय नेतृत्व के खुश होने के पीछे की वजह थोड़ी लंबी है। तमाम लोग कह रहे हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को भारतीय जनता पार्टी में वह सम्मान नहीं मिलेगा जो उन्हें कांग्रेस में मिलता था।

पहले के भाजपा के संदर्भ में देखें तो यह बात एक तरफ से वाजिब लगती किंतु वर्तमान भाजपा थोड़ी अलग है विचारधारा के स्तर पर

अमित शाह ज्यादा परवाह नहीं करते हैं और हर एक उस व्यक्ति को वह पार्टी में शामिल करने की पुरजोर कोशिश करते हैं जो लोकसभा चुनाव में मददगार हो सके। रोजगार, अर्थव्यवस्था और दूसरे तमाम मोर्चों पर केंद्र से जनता की नाराजगी को भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व बखूबी भाप रहा है ऐसी स्थिति में 2024 के लिए तमाम मोहरे तैयार किए जा रहे हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया भी राज्य में भाजपा की सरकार बने इससे ज्यादा केंद्रीय नेतृत्व के लिए इस हेतु महत्वपूर्ण है कि लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश से भारी मात्रा में भाजपा को सीटें मिलने में रुकावट ना हो। भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान नेतृत्व में ज्योतिरादित्य सिंधिया का मामला हो चाहे नीतीश कुमार का उन लोगों को पर्याप्त सम्मान देना जिनके प्रभाव से लोकसभा चुनाव में उसे मदद मिल सकती है। और यही हमें मध्य प्रदेश में देखने को मिला है।

– गणेश यादव, सम्पादक
(लोकतंत्र की बुनियाद, राष्ट्रीय हिंदी पत्रिका)

पूर्व निगम पार्षद और बुराड़ी विधानसभा से सांसद प्रतिनिधि गुलाब सिंह राठौड़ का विजन है ‘स्पष्ट’

पूर्व निगम पार्षद और बुराड़ी विधानसभा से बीजेपी के सांसद प्रतिनिधि गुलाब सिंह राठौड़ से हमारे प्रतिनिधि ने विशेष बातचीत के दौरान जब पूछा गया कि कुछ दिनों पहले संपन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में बुराड़ी में किस विजन के साथ आपने चुनाव की तैयारी की थी? इस प्रश्न के जवाब में गुलाब सिंह राठौर का कहना था कि मुख्य रूप से पार्टी और संगठन जो तय करता है उसी विजन को लेकर क्षेत्र में कार्य किया जाता है लेकिन वह निजी तौर पर भी जनता के हित को ध्यान में रखते हुए बुराड़ी में चुनाव कार्यक्रम का हिस्सा बने हुए थे। गुलाब सिंह राठौर का कहना है कि जनता का मूड होता है और जनता जब कोई मूड बना लेती है तो उसी के हिसाब से प्रतिनिधि का चुनाव करती है और फिर चुनाव के नतीजे बदल जाते हैं।

इसके साथ ही उन्होंने बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधि के मुद्दे को भी मजबूती से उठाया और कहा कि देश की राजधानी दिल्ली में नेशनल पार्टी के कार्यकर्ता को सिंबल नहीं प्राप्त हुआ और इन सभी को वह कहीं ना कहीं हार के लिए भी जिम्मेदार ठहराते हैं। वहीं प्रदेश स्तर नेतृत्व के संदर्भ में सवाल पूछा गया तो उनका कहना था कि प्रदेश स्तर पर बदलाव के बारे में सिर्फ संगठन निर्णय ले सकता है और जहां तक प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी जी की बात है तो वह बहुत बड़े स्टार हैं और जाहिर सी बात है ऐसे में उनके लिए क्षेत्र में समय निकाल पाना बहुत ज्यादा संभव नहीं हो पाता है।

गुलाब सिंह राठौर का कहना है कि मेरे नजरिया से प्रदेश स्तर पर उसी व्यक्ति को चुना जाना चाहिए जो अपने क्षेत्र में सक्रिय रहे और ज्यादा से ज्यादा लोगों से संपर्क कर सके तो इसके परिणाम बेहतर आते हैं। प्रदेश नेतृत्व क्षेत्र में समय देता है तो छोटा से छोटा कार्यकर्ता पार्टी से जुड़ा हुआ महसूस करता है जो किसी पार्टी के लिए बेहद जरुरी है। जब हमारे संवाददाता ने गुलाब सिंह राठौर से यह प्रश्न पूछा कि अगर संगठन प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी आपको देता तो आपका नजरिया क्या होगा कार्य करने का?

इस सवाल के जवाब में गुलाब सिंह राठौड़ ने कहा कि मेरा सौभाग्य होगा कि संगठन मुझे इस बड़ी जिम्मेदारी के लिए चुनता है। वहीं विजन की बात है तो मैं 11 अलग-अलग प्रदेशों में प्रवास कर चुका हूँ और उत्तर प्रदेश के छोटे से कस्बे का निवासी हूं। दिल्ली की जनता की सेवा दो बार निगम पार्षद बन कर चुका हूँ और अब भारतीय जनता पार्टी से जुड़ कर जनता की बेहतर से बेहतर सेवा करने की कोशिश करूंगा।

जहां तक प्रदेश स्तर के नेतृत्व के विजन की बात है तो मैं अपने अलग-अलग राज्यों में प्रवास के दौरान कार्यकर्ताओं को लोकल लेवल पर जोड़ने की कला जानता हूं और जब आप किसी से लोकल लेवल पर जुड़ते हैं, उनके मन मुताबिक और उनकी सुविधा के अनुसार योजनाएं बनाते हैं तो जाहिर सी बात है कार्यकर्त्ता इससे उत्साहित होता है और पार्टी संगठन को इससे निश्चित तौर पर फायदा पहुंचता है।

वहीं 2022 में होने वाले निगम पार्षद चुनाव में प्रतिनिधि चुनाव को लेकर जब उनके विचार पूछे गए तो श्री राठौर का कहना है कि किसी भी चुनाव में पार्टी संगठन बहुत बड़ा रोल निभाता है। लेकिन जहां तक निगम पार्षद चुनाव की बात है तो लोकल लेवल का चुनाव होता है और ऐसे में लोकल प्रतिनिधि फायदेमंद साबित होता है। क्योंकि पार्षद चुनाव में वही प्रतिनिधि सफलता पा सकता है जो जनता के बीच जाता है, जनता की बात सुनता है और जिसका फेस वैल्यू मायने रखता है। इतना ही उस क्षेत्र में लोग उसे उसके काम और उसके नाम से पहचानते हैं। ऐसे में पार्षद चुनाव में लोकल प्रतिनिधि और जनता को समय देने वाले प्रतिनिधि को मैदान में उतारा जाए तो निसंदेह सफलता पाई जा सकती है।

नोएडा में मिला एक और कोरोना वायरस पीड़ित, कंपनी के 700 कर्मचारी निगरानी में

नोएडा के एक प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले के कर्मचारी के अंदर कोरोना के पॉजिटिव लक्षण पाए गए हैं। वहीं एहतियात के तौर पर इस कंपनी में काम करने वाले सभी 700 कर्मचारियों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है।

नोएडा के सीएमओ ने जानकारी देते हुए यह बात स्पष्ट की है कि यह व्यक्ति कुछ दिनों पहले ही फ्रांस और चीन से वापस लौटा था। वही इस केस के सामने आने के बाद भारत में अब कोरोना वायरस पीड़ितों की संख्या 76 हो गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में 12 वायरस से पीड़ित लोग पाए गए हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज अधिकारियों के साथ मीटिंग करने वाले हैं जिसमे कोरोना से लडन की तैयारियों की जांच की जाएगी और स्कूलों को बंद करने का फैसला भी लिया जा सकता है।